मैं चुप हूँ

अमरदीप जौली

कश्मीर में हिन्दू मरे
मैं चुप हूँ…

पहलगाम में हिन्दू मरे
मैं चुप हूँ…

बांगलादेश में हिन्दू मरे
मैं चुप हूँ…

हिन्दू पायलट खुद घायल
सैकड़ों यात्री नहीं मरे
मैं चुप हूँ….

क्योंकि हिन्दुओं की मौत
पर बोलना लिखना
बिकता नहीं बाजार में…

इशारा मिलेगा जब

विदेशी आकाओं से

तब दहाड़ुगां

मैं चाभी के शेर सा

छब्बीस जनवरी
पन्द्रह अगस्त पर
घर पर झंण्डा
कभी
फहराया नहीं

श्रीनगर के
लाल चौक पर
झण्डा फहराने
कभी गया नहीं

आज जब हर
शहर में ऊंचे ऊंचे
झण्डे फहरा
रहे हैं…

शिखण्डी बन
कानून तोड़ने
के लिये
झंण्डे का सहारा
लेते हैं…

✍️सलिल

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