कहीं कोई हिन्दू
मर गया है
शायद
शायद इसलिये
क्योंकि
किसी ने देखा नहीं
किसी ने सुना नहीं
किसी ने कहा नहीं
सब हैं गान्धी के बन्दर
इतना ही तो कहा था
सब धर्म है बराबर
सब इन्सान है बराबर
जल गया एक चौराहे पर
किसी ने देखा नहीं
किसी ने सुना नहीं
किसी ने कहा नहीं
सब हैं गान्धी के बन्दर
सुकरात और गैलीलियो
की तरह मरता रहा
कहीं कोई चरचा नहीं
पर फिर उठेगा वो
सालो साल बाद
जब मर रहे होंगे सब
कहने को
सब धर्म बराबर नहीं होते
दीपू दास मरा नहीं
क्योंकि मुरदाघर में तो सभी मुरदे हैं
मुरदों में एक वही तो जिन्दा था😪😪
✍️सलिल




